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मूत्र रोगों में नामचीन अस्पतालों के दिग्गज डॉक्टर्स ने भी माना आयुर्वेद का लोहा,इस लेख को फॉरवर्ड कर आप किसी जरूरतमंद को लाभ पहुँचा सकते हैं

मित्रों नमस्कार'आयुष' मूत्र व गुर्दा रोग विशेषज्ञ होने के नाते हमेशा कोशिश रही है कि मेरे लेख के जरिये आप सभी पाठकों को विभिन्न स्रोतों व अनुभवों के आधार पर इस तथ्य से रु-ब-रु कराता रहूँ कि आयुर्वेद ही केवल मूत्र व गुर्दा रोगों से अधिकतम स्तर तक निजात दिलाने में सक्षम है।2 हज़ार वर्ष पूर्व महृषि चरक,आचार्य त्रिविक्रम आदि ने गुर्दा व सम्बंधित रोगों का 'वृक्करोगाधिकारः' 'मूत्ररोगाधिकर:' आदि के अंतर्गत इतना सूक्ष्म विवेचन कर दिया था कि आज तक वह अकाट्य है।

आयुर्वेद द्वारा आज हर वर्ष गुर्दा फेल हुए उन रोगियों तक का सफल इलाज हो रहा है जिन्हें ऐलोपैथी डायलिसिस व अंततः गुर्दा प्रत्यारोपण एकमात्र रोकथाम बता देता है,ध्यान दें केवल रोकथाम सम्पूर्ण इलाज फिर भी नहीँ।.

आयुर्वेद की इस विधा का लोहा मानकर मेरठ शहर के नामचीन अस्पताल के दिग्गज सर्जन ऑपरेशन किये गए मूत्र रोगियों में पञ्च तिक्त घृत गुग्गुलु,विषमुश्त्यादि वटी, प्रवाल पंचामृत व ऐसी अनेक औषधियों का एंटी-बियोटिक की तरह सफल और उत्साहवर्धक प्रयोग कर रहे हैं।वो बात अलग है कि उन्हें आयुर्वेद की इन कुछ चुनिंदा औषधियों का ज्ञान अपने कुछ व्यापारिक मित्रों की सहायता से उपलब्ध होता है व इन ऐलोपैथी चिकित्सकों को अन्य आयुर्वेदिक उच्च स्तरीय औषधियों का कोई ज्ञान नहीँ होता।अब जरा सोचें कि ऐसे मूत्र रोगों का इलाज जब दक्ष,अनुभवी व बहुत बारीकी से अध्ययन किये आयुर्वेदिक चिकित्सक से कराया जाएगा तो वह क्या नहीँ कर सकता