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शुगर या अन्य कारणों से गुर्दे में आयी दिक्कतें(यूरिया-क्रिएटिनिन बढ़कर)पेशाब व भूख की समस्याएँ बन जाना

शुगर या अन्य कारणों से गुर्दे में आयी दिक्कतें(यूरिया-क्रिएटिनिन बढ़कर)पेशाब व भूख की समस्याएँ बन जाना, सूजन आना,उल्टी होना जैसे रोगों में हमारे आयुर्वेदिक इलाज द्वारा मात्र 15 दिन में हो जाता है अभूतपूर्व लाभ व इन्सुलिन लगाने की जरूरत हो जाती है कम, बीपी सामान्य होकर हीमोग्लोबिन भी नार्मल हो जाता है,हमारे द्वारा चिकित्सा पाये ऐसे अनेकों रोगियों के उदाहरण हैं हमारे पास

ज्ञात हो कि पूरे भारतवर्ष में सैंकड़ों आयुर्वेदिक चिकित्सक करते हैं किड्नी फेल ठीक करने का दावा लेकिन गुर्दा फेल होने का कुछ भी कारण रहा हो व चाहे किसी भी उम्र, अवस्था आदि का रोगी हो यें सभी में प्रयोग करते हैं एक ही प्रकार की औषधियाँ(किट बनाकर बेचते हैं)और प्रयोग करते हैं बाज़ार में उपलब्ध आधे-अधूरे तरीके से furnace में बने कच्चे रस-रसायन जिससे किड्नी हो जाती है और भी अधिक खराब व आयुर्वेद होता है बदनाम।

इस बिंदु को भी बारीकी से समझना होगा कि जिस प्रकार बसों में बिकने वाली किताबों में ऐसे नुस्खे लिखे होते हैं कि मानो पहली खुराक में चमत्कार हो जाएगा, उसी प्रकार आजकल whats app आदि पर गोखरू काढ़ा,पुनर्नवा चूर्ण वाले नुस्खे पढ़कर लगता है कि किड्नी फेल जैसे रोगों में चमत्कार हो जाएगा - गुर्दा रोगी ऐसे नुस्खों को पूर्ण आयुर्वेद मान बैठता है और दक्ष आयुर्वेदिक चिकित्सक से भी ऐसे नाकामयाब व बहुत अधूरे नुस्खों के आकर्षण में आकर इलाज नहीँ कराता।अँग्रेजी चिकित्सा के जंजाल में यह मानकर फंस जाता है कि "आयुर्वेदिक इलाज तो मैंने करा ही लिया" जबकि सही मायने में उसने घरेलू टोने-टोटके किये होते हैं,इलाज नहीँ।

सर्वविदित हो कि विश्व के किसी भी कोने में गुर्दा फेल जैसे रोगों का अँग्रेजी इलाज में सिवाय डायलिसिस व अंततः गुर्दा ट्रांसप्लांट के कोई चारा नहीँ, इसलिए भ्रमित न हों व यदि

डा. निशान्त गुप्ता आयुष - बी.फ़ार्म,एम.आयु,एन.डी, पी.एच.डी(आयु),एम.डी - (पंचगव्य)*
  • बार-बार या कठिनाई व जलन के साथ पेशाब होना

  • पेशाब की धार पतली होना व पेशाब पूरा होने के बाद भी कुछ बूँदें गिरते रहना

  • पेशाब टेस्ट कराने पर हमेशा अनगिनत मवाद-कीटाणु(पस सेल्स)आना व प्रोटीन(एल्ब्यूमिन)आना

  • पेशाब के रोग के कारण गुर्दे में दिक्कत आ जाना या फिर पथरी, शुगर, हाई बीपी, गुर्दे पर चोट,अति शराब सेवन आदि के कारण डायलिसिस तक की नौबत आ जाना* *जैसे रोगों से पीड़ित हो चुके हैं तो केवल दक्ष आयुर्वेदिक चिकित्सक के सानिध्य में उपचार करायें व ऐसी सलाह देकर उपकार पायें

  • ज्ञात हो कि गुर्दा-पेशाब से सम्बंधित रोग देते हैं बहुत धीमी दस्तक और व्यक्ति अनदेखा करते-करते बन जाता है लाइलाज रोगी जिसका एलोपैथी चिकित्सा में आज तक कोई भी सटीक इलाज नहीँ जबकि आयुर्वेद में हज़ारों वर्ष पहले शोध के आधार पर 'वृक्कर्मण्यता' विषय के अंतर्गत ऐसे कठिन से कठिन रोगों का इलाज लिख दिया गया था जिसका सटीक ज्ञान कुछ ही चिकित्सकों के पास उपलब्ध रह गया है

इसलिए आप या आपकी नजर में है ऐसा कोई रोगी जो किसी भी प्रकार के उप्रलिखित मूत्र रोग से पीड़ित है तो हम दे सकते हैं फिर से खुशहाल जीवन वो भी पूरे वैज्ञानिक आधार के साथ