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किड्नी फेल या कठिन गुर्दा-मूत्र रोगी ध्यान दें

यह तो पक्का है कि आप एलोपैथी चिकित्सक को दिखा चुके होंगे व भली-भाँति यह भी आभास हो चुका होगा कि आरंभिक स्तर पर एंटीबायोटिक से व गुर्दा फेल जैसी स्थितियों में सिवाय डायलिसिस आदि से कंट्रोल करने के लिए एलोपैथी चिकित्सा में आज तक ऐसे रोगों का कोई इलाज है ही नहीँ

पर हो सकता है आपको यह पता ही न हो कि आयुर्वेद में ऐसे गुर्दा रोगों तक का सटीक इलाज 'वृक्करोगाधिकारः' के अंतर्गत हज़ारों वर्ष पहले लिख दिया गया था जिनमें आधुनिक चिकित्सक गुर्दा प्रत्यारोपण(किड्नी ट्रांसप्लांट)ही एकमात्र विकल्प बता देते हैं।

यहाँ एक बात और समझने वाली है कि हाँलाकि लगभग हर आयुर्वेदिक चिकित्सक गुर्दा रोगों का इलाज करने का दावा करते हैं व गुर्दा रोगों में प्रयुक्त होने वाली 90% औषधियों का सभी को पता होता है लेकिन सबसे बड़ा फ़र्क़ यही है कि ऐसे जटिल रोगों में यह बात बहुत मायने रखनी है कि यदि ये औषधियाँ उसी शास्त्रोक्त विधि से बनी होंगी तो अपना प्रभाव देंगी अन्यथा नहीँ।अधिकतर आयुर्वेदिक फार्मेसी द्वारा ऐसी औषधियों में डलने वाले घटक और बनाने की विधि इतनी न्यून स्तर की कर दी गयी हैं कि वें अपना प्रभाव ही नहीँ देती।

अधिकतर सम्मानित वैद्यगण मेहनत से बचने के लिए या फिर ऐसी औषधियाँ बनाने का ज्ञान न होने के कारण ऐसी अधूरी विधि,कच्ची भस्म युक्त औषधियाँ प्रयोग करते हैं जिनके कारण प्रभाव नहीँ मिलता।गुर्दा रोग में बहुतायत प्रयोग होने वाली बाज़ारू चंद्रप्रभा वटी,गोक्षुरादि गुग्गुलु तक अल्प परिणाम वाली हो गई है व 'सर्वतोमाहेश्वर वटी,निर्विशियादि वटी आदि जैसी औषधियाँ तो अब कोई भी विश्वसनीय फार्मेसी बनाती ही नहीँ।

डा. निशान्त गुप्ता आयुष - बी.फ़ार्म,एम.आयु,एन.डी, पी.एच.डी(आयु),एम.डी - (पंचगव्य)*

ऐसी औषधियाँ स्वयं बनाकर उनसे इलाज करने के कारण ही चंद आयुर्वेदिक चिकित्सक आज भारतवर्ष में गुर्दा फेल जैसे रोगियों का सफल इलाज कर पा रहे हैं,इसके अलावा यह बिंदु भी समझने वाला है कि अलग-अलग कारण से अलग-अलग मूत्र-गुर्दा रोग पनपते हैं तो फिर उनके लिए एक जैसी दवाओं की किट बनाकर व बेचकर कैसे इस प्रकार के जटिल मूत्र-गुर्दा रोगों को ठीक किया जा सकता है(अधिकतर तथाकथित विशेषज्ञों द्वारा इसी प्रकार का अपूर्ण,गैर वैज्ञानिक चिकित्सा व्यापार देखने को मिल रहा है*