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यदि आप कठिन से कठिन गुर्दा रोग(किड्नी फेल आदि)से पीड़ित होने पर आधुनिक चिकित्सक

यदि आप कठिन से कठिन गुर्दा रोग(किड्नी फेल आदि)से पीड़ित होने पर आधुनिक चिकित्सक को दिखाकर यह मान रहे हैं कि आप ठीक हो जायेंगे तो आप गलती पर हैं, शास्त्रों में हज़ारों वर्ष पहले ऐसे रोगों को 'वृक्कसन्यास' आदि नामों से वर्णित कर सटीक इलाज लिख दिया गया था व आज भी केवल इसी पद्यति द्वारा ऐसे भयावह रोगों की चिकित्सा संभव है

मित्रों नमस्कार *आयुष मूत्र व गुर्दा रोग विशेषज्ञ होने के नाते अपनी बात के समर्थन में हर बार की तरह इस बार भी अपने लेख के हैडिंग के समर्थन में स्त्रोत दूँगा जो मेडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित 'डायबिटीज एंडोक्राइनोलॉजी' से लिया गया है

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि "भारत व ऐसे अनेकों विकसित हो रहे देशों में शुगर या अन्य कारणों से गुर्दे के जटिल रोगी मात्र अत्याधुनिक अस्पतालों की चकाचौंध व ऐसा मानकर कि जो एलॉपैथी चिकित्सक ने बताया दिया वही सही चिकित्सा है - असमय मौत का कारण बन सकते हैं व गैर जरूरी जाँचों के कारण ऐसे रोगियों में से लगभग 40% रोगी अपने जीवन काल में एक बार जरूर निर्धनों की श्रेणी में आ जाते हैं।इस रिपोर्ट तक ने पूरे विश्व में भारत में विकसित हर्बल रेमेडीज(जड़ी-बूटी चिकित्सा) व इससे संबंधित अनेकों वैकल्पिक चिकित्सायों(पंचकर्म, प्राकृतिक चिकित्सा आदि)को बेहतर व अधिकतम कारगर विकल्प माना

बताना चाहेंगे कि आयुर्वेद में बहूमूत्रता,मूत्रकृच्छता, स-दाह व स-पूय मूत्र निवृत्ति,शोथ, वमन,कटि-शूल जैसे लक्षणों व अष्ट विधि परीक्षण एवं विशेष स्थितियों में केवल कुछ सस्ती जाँचों के आधार पर डायलिसिस करा रहे किड्नी फेल व अन्य जटिल मूत्र रोगियों को स्वस्थ जीवन दिया जाता है जिन्हें आधुनिक चिकित्सकों द्वारा केवल क्रिएटिनिन व यूरिया बढ़ने पर गुर्दा रोगी मान लिया जाता है और ऐसा बेचारा रोगी बिना जरूरत के हर बार यह मानकर कि "अगली बार डायलिसिस नहीँ करानी पड़ेगी अपने प्राण त्याग देता है

डा. निशान्त गुप्ता आयुष - बी.फ़ार्म,एम.आयु,एन.डी, पी.एच.डी(आयु),एम.डी - (पंचगव्य)*

आयुर्वेद में 'वृक्करोगाधिकारः' आदि श्रेणियों के अंतर्गत हज़ारों वर्ष पूर्व मूत्र व किड्नी(वृक्क)रोगों का इतना सूक्ष्म विवेचन कर परिष्कृत औषधियों द्वारा इसका निदान लिख दिया था कि आयुर्वेद के इस सामर्थ्य को जानकर बहुतेरे आधुनिक चिकित्सक तो जानबूझकर आयुर्वेदिक औषधियाँ लेने से मना करते हैं व रोगी को डायलिसिस कराते रहना व अंततः गुर्दा प्रत्यारोपण ही कठिन मूत्र रोगों का एकमात्र इलाज बताते हैं जबकि क्या है आयुर्वेदिक औषधियों की वैज्ञानिकता व कैसे भयावह रोगों में है ये आधुनिक चिकित्सा से भी अधिक कारगर