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मीठे और स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ(आलू आदि)से बचने के बावजूद भी शुगर रोगी जाँच के दौरान अपने रक्त में शर्करा की मात्रा में निरंतर बढ़ोतरी महसूस करते हैं

मीठे और स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ(आलू आदि)से बचने के बावजूद भी शुगर रोगी जाँच के दौरान अपने रक्त में शर्करा की मात्रा में निरंतर बढ़ोतरी महसूस करते हैं और अंग्रेजी इलाज के आडंबर व बड़े-बड़े अस्पतालों में अपना इलाज कराकर स्टेटस सिंबल समझने वाले यें रोगी रोज कई-कई इंजेक्शन लगाते हैं पर शुगर फिर भी अनियंत्रित होता जाता है, मैं बताऊँगा ? क्यों?

मित्रों नमस्कार *शुगर संबंधी अपने विभिन्न लेखों से मैं समझाता आया हूँ कि किस प्रकार शुगर रोगी गलत-सलत और मिश्रित (अँग्रेजी व देशी) चिकित्सा के चक्कर में फंस रोज अपना जीवन बर्बाद करता है।

शुगर अब लाइलाज नही' व 'शुगर जड़ से ख़त्म' जैसे जुमले पढ़कर पैसा लुटाता है क्योंकि वह इस तथ्य से अनभिज्ञ होता है कि आयुर्वेद शास्त्रों में मधुमेह(शुगर)को प्रमेह के 20 प्रकार में से एक प्रकार माना गया है व असाध्य(न ठीक होने वाला कहा गया है)

पूरी संभावना होती है कि वह शुरुआत में मधुमेह रोगी न होकर प्रमेह रोगी होता है लेकिन अधिकतर आयुष चिकित्सक व सभी अंग्रेजी चिकित्सक इसकी पहचान नही कर पाते और मशीनी रीडिंग के अनुसार(जिसके मानक हर तीसरे वर्ष बदलते हैं)उसे शुगर रोगी मान लेते हैं जबकि सही मायने में वह शुरुआत में शुगर रोगी नही होता(प्रमेह रोगी होता है) व गलत चिकित्सा के चक्कर में पड़ कुछ अपनी व कुछ डॉक्टरों की गलती से शुगर रोगी बनता है।

डा. निशान्त गुप्ता आयुष - बी.फ़ार्म,एम.आयु,एन.डी, पी.एच.डी(आयु),एम.डी - (पंचगव्य)*

शास्त्रों व सतत गुरु सानिध्य अध्ययन के आधार पर मैं हमेशा कहता आया हूँ कि शुगर का संबंध केवल मीठे पदार्थों से नही बल्कि वसा(चिकनाई) से भी है जिसे अब अमेरिका के हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ ने भी माना कि जो लोग संतृप्त वसीय अम्ल और एनिमल फैट(घी, मक्खन आदि) का ज्यादा प्रयोग करते हैं उनमें शुगर का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है

बहुत लंबे समय से मैं शरीर में कैसा भी दर्द व मधुमेह(शुगर)रोग के प्रबंधन व ऐसी प्राकृतिक दवाओं पर अपने कुछ अति विशिष्ट सहकर्मी शोधकर्ताओं के साथ शोध कर रहा हूँ (ओखलामा यूनिवर्सिटी से परा स्नातक डॉ नील बर्नार्ड व अन्य) जिसके तहत हमने मधुमेह का सम्पूर्ण रूप से परिवर्तन व उन्मूलन करने के लिए आहार-विहार,दिनचर्या व अति परिष्कृत औषधियों से ऐसे कुछ प्रबंधन का आविष्कार किया है जिनको ग्रहण कर शुगर रोगी अन्य सामान्य व्यक्तियों की तरह अपना जीवन यापन कर सकता है

शुगर के भयावह रूप से चिंतामुक्त हो जाएंगे ऐसा हमारा वादा है

हमारे इस उपचार के दौरान दूर-दराज के रोगी से भी वार्तालाप कर पूरा रोग इतिहास,रहन-सहन,उसकी भूगौलिक स्थिति आदि जानकर निर्धारित किया जाएगा कि वह किस स्तर का प्रमेही या शुगर रोगी है व क्यों है❓❓फिर उसी अनुरूप उसके लिए आहार-तालिका(डाइट चार्ट)व औषधियाँ बनाकर भेजी जाएँगी। शुगर के इस प्रबंधन उपचार को अपनाकर वह हमारे अनुसार हर खाने-पीने वाली वस्तु(मांसाहार छोड़कर)का प्रारूप बदलकर खा-पी सकता है व मधुमेह (या प्रमेह)को अधिकतम स्तर तक हरा सकता है

तो यदि वाकई में आपने इस लेख का एक-एक शब्द ध्यान से पढा है,समझा है और शुगर रोगी हैं और दो-चार गोलियाँ खाते रहने के बाद इन्सुलिन इंजेक्शन लगाने से अपना जीवन बचाना चाहते हैं(या वर्तमान में लगा रहे हैं) तो नीचे दिए गए whats app नं पर संपर्क कर शुगर को अधिकतम संभव स्तर तक हराने का उपाय पायें जिसका मूल्य ₹50 से ₹200 प्रतिदिन तक देय हो सकता है।

केवल वही रोगी संपर्क करें जो मधुमेह प्रबंधन पर हमारे इस लेख के आशय की बारीकियों को समझ चुके हैं व चूर्ण-चपट्टे, अँग्रेजी दवायें खाकर,इन्सुलिन लगा-लगाकर खूब थक चुके हैं व हमारे समय को भी अमूल्य समझकर केवल बात करने के लिए संपर्क नही करेंगे,धन्यवाद